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Vibhishan Ki Anuchinta

Nominated | Book Awards 2021 | Hindi Fiction

Vibhishan Ki Anuchinta

Full Title: Vibhishan Ki Anuchinta

Author: Anil Puroshit
Publisher: Vani Prakashan

Award Category: Hindi Fiction
About the Book: 

युद्ध विध्वस्त देश, समाज और युग के लिए पुनर्विन्यास एक दुरूह दायित्व रहा है। विश्वयुद्ध से भी भयानक विनाश विभीषण देखता है। अपने इस उद्यम में वह सबका सहयोग व समर्थन लेता है। सबकी सुनकर निर्माण में जुटता है। अग्रज द्वारा ठुकराने पर वह और उसके सारे समर्थक चले जाते हैं। नये मानव-मूल्यों की नींव, जीवन विश्वास और सद्भाव की नींव पर नये समाज के गठन का संकल्प लेता है विभीषण। इसी की आधारभूमि है यह अनुचिन्तन।


About the Author: 

1 मई 1966 को कटक, ओडिशा में जन्मे अनिल पुरोहित ने बीएस.सी. (एग्रीकल्चर) करने के बाद फाइनेंशियल मैनेजमेंट में पीजी डिप्लोमा प्राप्त किया है। पठन, लेखन और भ्रमण में रुचि रखने तथा स्वतन्त्र विचारों वाले अनिल जी के मन को आसपास घटने वाली अमानुषिक घटनाएँ कचोटती हैं। अपनी संस्कृति और सभ्यता की स्वार्थ पर बलि देख मन बेचैन-सा हो जाता है। पर दिमाग अब भी सोचता है कि बदलाव आ सकता है, बस सोच बदलने की देर है। इसी प्रेरणा से क़लम ख़ुद-ब-ख़ुद लिखने को आतुर हो जाती है और वह पाठकों तक मन की बात पहुँचाने की कोशिश करते हैं। कविता के माध्यम से जागे हुए व्यक्तित्व की सोयी हुई आत्मा को जाग्रत करने का प्रयास अनवरत जारी है। प्रकाशित रचनाएँ : शहर की पगडण्डी, अन्तःपुर की व्यथा-कथा, तहखाने का अँधेरा, सीता का सफ़र वाल्मीकि तक (दो संस्करण) ओड़िया अनुवाद, बंगला में अनूदित, एक और भीष्म (ओड़िया अनुवाद), सात समन्दर पार। सम्पादन : विश्वा (अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी समिति) तथा राना मैगज़ीन के सह-सम्पादक। हिन्दी साहित्य सभा (टोरंटो) के 2016 से 2018 तक अध्यक्ष रहे। पुरस्कार : विश्व हिन्दी संस्थान, मॉरिशस से अन्तरराष्ट्रीय कविता प्रतियोगिता में द्वितीय स्थान। सम्प्रति : कनाडा में सरकारी पद पर सेवारत। ई-मेल : pakere@gmail.com


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