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Samkaleen Rajnitik Siddhant (Contemporary Political Theory)

Longlisted | Book Awards 2021 | Hindi Non-fiction

Samkaleen Rajnitik Siddhant (Contemporary Political Theory)

इस पुस्तक में बीसवीं सदी के प्रारम्भिक वर्षों से लेकर अंतिम दशकों तक की अवधि में विकसित और चर्चित सिद्धांत और विचारधाराओं को समेटने का प्रयास किया गया है। इस पुस्तक में व्यवहारवाद और उत्तर-व्यवहारवाद, राजनीतिक सिद्धांत का पतन और उसका पुनरुत्थान सहित विचारधारा का अंत, उत्तर-आधुनिकता, नारीवाद, पारिस्थितिकीवाद, सामुदायिकवाद, बहुसंस्कृतिवाद और इतिहास का अंत जैसे नए विषयों का समावेश किया गया है। इसी प्रकार मार्क्सवादी सिद्धांत में मार्क्स, लेनिन और माओ-त्से-तुंग के साथ-साथ ग्राम्शी, सार्त्र और अलथुसर जैसे नव-मार्क्सवादी विचारकों पर भी चर्चा की गई है। यह पुस्तक विद्यार्थियों, शोधार्थियों और प्राध्यापकों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी और राजनीतिक सिद्धांत की परंपरा और उसकी विविधता से उनका परिचय हो सकेगा।

Full Title: Samkaleen Rajnitik Siddhant (Contemporary Political Theory)

Author: Karunesh Pratap Mishra
Publisher: Orient BlackSwan

Award Category: Hindi Non-fiction
About the Book: 

This is a core book on contemporary political theory. It covers in its 15 chapters contemporary topics of political theory, including the topics of western political theory prescribed in the UGC Model Curriculum. The language is simple (Hindi) and there is ample discussion of traditional topics like fall and rise of political theory, Marxism, libertarianism, etc. Newer topics like ecologism and end of history are also included. The contents include: meaning, nature and significance of political theory and importance of classical traditional problem of interpretation; behaviouralism and post-behaviouralism; decline of political theory : David Easton, Alfred Cobban and Germino; revival of political theory : Leo Strauss, Michael Oakeshott, Voegilin, Jouvenel, Berlin, Arendt and Rawls; end of ideology; Marxist political theory; libertarianism, postmodernity, feminism, multiculturalism, communitarianism, ecologism; end of history. There is also a concluding chapter discussing in a nut shell the contents of the work. The book is appended with bibliography, list of important political theories and thinkers and an index.


About the Author: 

Dr. Karunesh Pratap Mishra is Assistant Professor, Department of Political Science, Government Tilak P.G. College, Katni, Madhya Pradesh. Dr. Mishra has Masters and Ph. D. from Patna University, Patna. He has been teaching Political Science to undergraduate and postgraduate students for over twenty years, including ten years of postgraduate teaching.


Excerpt: 

राजनीतिक सिद्धांत के सर्वमान्य अर्थ का निर्धारण कठिन है। सामान्य तौर पर राजनीतिक सिद्धांत का अर्थ राजनीति का व्यवस्थित ज्ञान है। यह राजनीति से संबंधित विभिन्न तर्कों, अवधारणाओं तथा सामान्य निष्कर्षों पर आधारित होता है। उनके आधार पर राजनीति की समझ को व्यवस्थित ज्ञान का रूप दिया जाता है। प्रारंभ में राजनीति को राज्य और सरकार के संदर्भ में समझने का प्रयास किया गया। इसलिए राजनीतिक सिद्धांत को राज्य और सरकार से संबंधित मामलों का व्यवस्थित ज्ञान माना गया। यह राज्य और सरकार जैसी राजनीतिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली की व्याख्या तथा उनको औचित्यपूर्ण ठहराने वाले विचारों का विश्लेषण करता है। यह उनके दोषों को भी सामने लाता है। इस रूप में राजनीतिक सिद्धांत व्याख्या के साथ-साथ मूल्यांकन का भी कार्य करता है। मूल्यांकन का आधार अच्छे समाज और राज्य तथा व्यक्ति के अच्छे जीवन से संबंधित अवधारणाएँ होती हैं। उनके आधार पर राजनीतिक सिद्धांत राज्य और सरकार के लक्ष्यों और उनको प्राप्त करने वाले साधनों से संबंधित विचारों को प्रस्तुत करता है। बाद में व्यवहारवादियों ने राजनीति को संस्थाओं के संदर्भ में समझने के स्थान पर उसे एक प्रक्रिया के रूप में समझने पर बल दिया।


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