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Prem Ke Vibhin Rang

Nominated | Book Awards 2021 | Hindi Fiction

Prem Ke Vibhin Rang

जीवन क्या है : विभिन्न मानवीय क्रियाओं का लेखाजोखा! इन क्रियाओं के केन्द्र में जो मूल भाव है : वह है प्रेम का भाव। चाहे प्रेम प्रियतम से हो, प्रकृति से, बच्चे से या माँ-पिता से, हर व्यक्ति प्रेम चाहता है, प्रेम करना चाहता है व निभाना चाहता है। इसी प्रेम के वशीभूत होकर, कई बार लिखना चाहा, लिखकर मिटा दिया, लेकिन कई भाव जो आँसुओं से अमिट हो गये, उन्होंने अनायास ही कविताओं का रूप ले लिया। विदेश सेवा में घर से दूर, देश से दूर-परदेस में रहने के कारण मैंने रिश्तों की महत्ता समझी-प्रेम के विभिन्न रूपों को पहचाना। उन क्षणों में जब व्यक्ति डिप्रेशन का शिकार हो सकता है-मुझे मेरे देश-प्रेम और रिश्तों के प्रेम की लौ ने ऊष्मा प्रदान की और मुझे जीवन्त बनाये रखा। प्रस्तुत प्रथम कविता संग्रह में प्रेम से लिखी गयी-प्रेम के विभिन्न रूपों को मन के कैमरे से पकड़ने की कवायद है। मुख्यतः प्रवास में लिखी गयी इन कविताओं में कहीं मूक पुकार है, कहीं क्रन्दन है, कहीं अभिनन्दन है तो कहीं-कहीं मिलन के राग भी हैं। इस कविता संग्रह में एक दशक से जमी देश और अपनों की जुदाई की बर्फ को परत-दर-परत हटाने की कोशिश है, जो कि अपने लोग और स्वदेश प्रेम की यादों की गरमाहट से कभी पिघलती है, तो कभी उस पर और भी तुषारापात हो जाता है। आशा है, आप पाठकों को यह कविता संग्रह पसन्द आयेगा। -अंजु रंजन

Full Title: Prem Ke Vibhin Rang

Author: Anju Ranjan
Publisher: Vani Prakashan

Award Category: Hindi Fiction
About the Book: 

जीवन क्या है : विभिन्न मानवीय क्रियाओं का लेखाजोखा! इन क्रियाओं के केन्द्र में जो मूल भाव है : वह है प्रेम का भाव। चाहे प्रेम प्रियतम से हो, प्रकृति से, बच्चे से या माँ-पिता से, हर व्यक्ति प्रेम चाहता है, प्रेम करना चाहता है व निभाना चाहता है। इसी प्रेम के वशीभूत होकर, कई बार लिखना चाहा, लिखकर मिटा दिया, लेकिन कई भाव जो आँसुओं से अमिट हो गये, उन्होंने अनायास ही कविताओं का रूप ले लिया। विदेश सेवा में घर से दूर, देश से दूर-परदेस में रहने के कारण मैंने रिश्तों की महत्ता समझी-प्रेम के विभिन्न रूपों को पहचाना। उन क्षणों में जब व्यक्ति डिप्रेशन का शिकार हो सकता है-मुझे मेरे देश-प्रेम और रिश्तों के प्रेम की लौ ने ऊष्मा प्रदान की और मुझे जीवन्त बनाये रखा। प्रस्तुत प्रथम कविता संग्रह में प्रेम से लिखी गयी-प्रेम के विभिन्न रूपों को मन के कैमरे से पकड़ने की कवायद है। मुख्यतः प्रवास में लिखी गयी इन कविताओं में कहीं मूक पुकार है, कहीं क्रन्दन है, कहीं अभिनन्दन है तो कहीं-कहीं मिलन के राग भी हैं। इस कविता संग्रह में एक दशक से जमी देश और अपनों की जुदाई की बर्फ को परत-दर-परत हटाने की कोशिश है, जो कि अपने लोग और स्वदेश प्रेम की यादों की गरमाहट से कभी पिघलती है, तो कभी उस पर और भी तुषारापात हो जाता है। आशा है, आप पाठकों को यह कविता संग्रह पसन्द आयेगा। -अंजु रंजन


About the Author: 

अंजु रंजन भारतीय विदेश सेवा की वरिष्ठ अधिकारी हैं। वे अभी भारत के कॉन्सल जनरल, जोहान्सबर्ग में पदस्थापित हैं। वे इंडोनेशिया, नेपाल तथा स्काटलैंड में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। अतिरिक्त भाषा के रूप में इन्होंने इंडोनेशिया भाषा में स्नातकोत्तर एडवांस डिप्लोमा फॉर डिप्लोमैट विशेष दक्षता के साथ हासिल किया है। अंजु रंजन केमिस्ट्री में स्नातकोत्तर हैं और स्वर्ण पदक विजेता रही हैं तथा इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) भी किया है, पर हिन्दी साहित्य में उनकी शुरू से रुचि रही है। इसी कारण, यूपीएससी की परीक्षा में हिन्दी साहित्य इन्होंने मुख्य विषय के रूप में लिया था। उन्होंने हिन्दी साहित्य का स्वाध्ययन किया है और बहुत पढ़ा है। वे विदेश में हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिए प्रयासरत हैं और विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से हिन्दी को लोकप्रिय बना रही हैं। 'प्रेम के विभिन्न रंग' कवयित्री का प्रकाशित प्रथम कविता संग्रह है।


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