Simply enter your keyword and we will help you find what you need.

What are you looking for?

Jas Kaa Phool

Shortlisted | Book Awards 2020 | Creative Writing in Hindi (Fiction & Poetry)

Jas Kaa Phool

Author: Bhalchandra Joshi
Publisher: Rajkamal Prakashan

Award Category: Creative Writing in Hindi (Fiction & Poetry)
About the Book: 

प्रकट में तो यह उपन्यास एक हिन्दू लडक़े और मुस्लिम लडक़ी की प्रेम कहानी है, जिसकी छोटे शहर से चलकर बड़े शहर तक की यात्रा रोमांच, रोमांस और इनके बीच जीवन-यथार्थ के अच्छे-बुरे और कड़वे-मीठे अनुभवों से गुज़रती है। अनचाहे, अनजाने ही ऐसी स्थिति बनती है कि नायक, वह हिन्दू लडक़ा दोस्तों के बीच शाहरुख और मुस्लिम लडक़ी यानी नायिका, काजोल के नाम से पुकारी जाने लगती है। यह एक आम घटना है जो अक्सर कहीं भी घटित होती है। प्रेम प्राय: असफलता से नालबद्ध है। अक्सर ऐसे प्रेम की परिणति हताशा की राह चलकर शराबखाने से होती हुई ‘देवदासीय मृत्यु’ है। लेकिन इस उपन्यास में प्रेम उस शक्तिपुंज की भाँति अदृश्य रूप से मौजूद है जो एक अद्र्धशिक्षित लडक़े को फिल्मों जैसी आभासी दुनिया से बाहर लाकर तमाम हताशा, कुंठा और अभावों के बावजूद उसके भीतर के करुण मनुष्य को पूरी मानवीय मार्मिकता के साथ सुरक्षित रखता है। नायक शाहरुख प्रेम की उस तरल उपस्थिति के कारण ही अपनी विपरीत परिस्थितियों से प्रतिरोध की शक्ति हासिल करता है। इसी के साथ उपन्यास में उसके वे तमाम दोस्त हैं जो हिन्दू-मुस्लिम होते हुए, और अपनी अशिक्षा के बावजूद, अपनी ज़रूरी मनुष्यता के साथ अपने अबोध मन की मार्मिक सांगिकता लिए मित्रता के लम्बे और अटूट रिश्तों से वचनबद्ध हैं। बाज़ार का क्रूर आगमन और भूमंडलीकरण द्वारा तेज़ी से बदलता समय समाज और रिश्तों को कैसे और कितनी तेज़ी से प्रभावित कर रहा है, इससे वे अनभिज्ञ हैं। यह भी हमारे समय का एक भयावह सच है, जो इस उपन्यास में कथ्यात्मक ज़रूरत के साथ मौजूद है। पाठकों को यह दिलचस्प लगेगा कि इन पात्रों की उपस्थिति और अबोध जिज्ञासाएँ अपनी मासूमियत में एक ऐसा रोचक संसार भी रचती हैं जिसकी जटिलता से वे अनजान हैं। इस उपन्यास में व्यंग्य की एक समानान्तर धारा पात्रों की ‘मौलिक धज’ को प्रकट करने के कारण ज़रूरी थी, लेकिन वह सहज ही रोचक भी लगेगी।.


About the Author: 

भालचन्द्र जोशी पेशे से इंजीनियर हैं और अंग्रेजी साहित्य में एम.ए. भी किया है। आठवें दशक के उत्तरार्द्ध में कहानी लेखन की शुरुआत। आदिवासी जीवन पद्धति तथा कला का विशेष अध्ययन। निमाड़ की लोक-कलाओं और लोक-कथाओं पर काम। चित्रकला में सक्रिय रुचि। देश के प्रमुख अखबारों के लिए समसामयिक विषयों पर लेखन। कुछ समय तक लघु पत्रिका 'यथार्थ’ का सम्पादन। इसके अतिरिक्त 'कथादेश’ के नवलेखन अंक (जुलाई 2002) का सम्पादन। टेलीविजन के लिए क्लासिक सीरीज में फिल्म लेखन। कहानियों का अन्य भारतीय भाषाओं में अनुवाद। हायर सेकंडरी हेतु एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम के लिए पुस्तक 'इनवाइरॉन्मेंटल एजुकेशन एंड डिजास्टर मैनेजमेंट’ प्रकाशित। कहानी संग्रह 'नींद से बाहर’, 'पहाड़ों पर रात’, 'चरसा’, 'पालवा’ और 'जल में धूप’ प्रकाशित तथा कथा-आलोचना पुस्तक 'यथार्थ की यात्रा’ प्रकाशित। एक उपन्यास 'जस का फूल’ शीघ्र प्रकाश्य। मध्य प्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन का 'वागीश्वरी पुरस्कार’। अम्बिका प्रसाद दिव्य स्मृति पुरस्कार। इंडिपेंडेंट मीडिया इनिशिएटिव सोसायटी दिल्ली (हिन्दी पत्रिका 'पाखी’) का वर्ष 2012 का शब्द-साधक जनप्रिय लेखक सम्मान तथा मध्य प्रदेश अभिनव कला परिषद, भोपाल द्वारा अभिनव शब्द-शिल्पी सम्मान। सम्पर्क: 'एनी’, 13 एच.आई.जी. ओल्ड हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, जैतापुर, खरगोन-451 001 (म.प्र.)|


Write a Review

Review Jas Kaa Phool.

Your email address will not be published. Required fields are marked *