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Besharam

Shortlisted | Book Awards 2020 | Translated into Hindi

Besharam ()

Author: Taslima Nasrin
Publisher: Rajkamal Prakashan
Translator: Utpal Banerji
Original Language: Bangla

Award Category: Translated into Hindi
About the Book: 

तसलीमा नसरीन का यह उपन्यास उन लोगों के विषय में है जो अपनी जन्मभूमि को छोड़कर किसी और देश में, दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में, पराए माहौल और पराई आबोहवा में अपना जीवन बिता रहे हैं। कहने की ज़रूरत नहीं कि तसलीमा ने यह जीवन बहुत नज़दीक से जिया है। उनकी विश्व-स्तर पर चर्चित पुस्तक ‘लज्जा’ के लिए उन्हें कट्टरपंथियों ने देशनिकाला दे दिया था। लम्बा समय उन्होंने अपने मुल्क से बाहर बिताया है। इस उपन्यास में उन्होंने अपनी जड़ों से उखड़े ऐसे ही जीवन की मार्मिक और विचारोत्तेजक कथा कही है। स्वयं उनका कहना है कि यह उपन्यास ‘लज्जा’ की तरह राजनीतिक नहीं है, इसका उद्देश्य निर्वासन की सामाजिक दुर्घटना और उसकी परिस्थितियों को रेखांकित करना है। उपन्यास के सभी पात्र निश्चित रूप से उन चेहरों की अक्काशी करते हैं जिन्हें साम्प्रदायिक उन्माद और अत्याचार के चलते अपना घर छोडऩा पड़ा और बेगानी आबोहवा में साँस लेते हुए जीने की नई मुहिम शुरू करनी पड़ी।


About the Author: 

तसलीमा नसरीन (जन्म : २५ अगस्त १९६२) बांग्ला लेखिका एवं भूतपूर्व चिकित्सक हैं जो १९९४ से बांग्लादेश से निर्वासित हैं। १९७० के दशक में एक कवि के रूप में उभरीं तसलीमा १९९० के दशक के आरम्भ में अत्यन्त प्रसिद्ध हो गयीं। वे अपने नारीवादी विचारों से युक्त लेखों तथा उपन्यासों एवं इस्लाम एवं अन्य नारीद्वेषी मजहबों की आलोचना के लिये जानी जाती हैं।उन्होंने 1990 के दशक की शुरुआत में अपने निबंधों और उपन्यासों के कारण वैश्विक ध्यान प्राप्त किया, जो नारीवादी विचारों और आलोचनाओं के साथ था कि वह इस्लाम के सभी "गलत" धर्मों के रूप में क्या करती हैं।वह प्रकाशन, व्याख्यान और प्रचार द्वारा विचारों और मानवाधिकारों की आजादी की वकालत करती है।


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