Simply enter your keyword and we will help you find what you need.

What are you looking for?

रामविलास पासिान

Shortlisted | Book Awards 2021 | Hindi Non-fiction

रामविलास पासिान

Full Title: रामविलास पासिान; संकल्प, साहस और संघर्ष/

Author: प्रदीप श्रीिास्ति
Publisher: Penguin Random House India

Award Category: Hindi Non-fiction
About the Book: 

रामविलास पासिान की इस जीिनी में वबहार के खगवड़या वजले के एक सुदूर गााँि शहरबन्नी से शुरू हई उनकी
जीिन और राजनीवतक यात्रा से लेकर, उनके व्यक्तिगत संघर्षों और उनके मूल्ो ं का विशद िर्णन ह़ै। यह
जीिनी इस मायने में भी खास ह़ै क्ोवं क पासिान की जीिनी आज़ाद भारत के अहम कालखंड की राजनीवतक
दास्ां भी साथ में बयााँ करती चलती ह़ै। इस वकताब में पासिान के व्यक्तिगत और राजनीवतक जीिन के सफ़र
के कई ऐसे अनछु ए पहलुओं को समेर्टा गया ह़ै जो दुवनया की नज़रो ं से अभी तक ओझल रहे हैं।
पासिान को ऐसा नेता माना गया जो सभी िगों और समुदायो ं में समान रूप से लोकविय थे और वजन्ोनं े अपने
सभी कायणकाल में ऐसे जनवहतकारी फ़ै सले वकए वजससे उन्ें ‘विकास पुरुर्ष’ के तौर पर जाना गया। अपने पााँच
दशको ं से भी ज़्यादा के राजनीवतक जीिन में पासिान ने कई अहम पदो ं की वज़म्मेिाररयााँ संभाली वजसमें रेलिे,
संचार और सूचना तकनीक और के वमकल और फवर्टणलाइज़र ज़ैसे मंत्रालयो ं की वजम्मेिाररयााँ भी शावमल थी।ं अपनी
मृत्यु से ठीक पहले िह मौजूदा कें द्र सरकार में खाद्य, सािणजवनक वितरर् और उपभोिा मामलो ं के मंत्री थे।
िररष्ठ लेखक िदीप श्रीिास्ि ने इसे बेहद पठनीय ढंग से वलखा ह़ै


About the Author: 

प्रदीप श्रीवास्तव वरिष्ठ पत्रकार हैं जिन्होंने करीब तीन दशक तक देश की मुख्यधारा की राजनीतिक रिपोर्टिंग की है। वे दो दशक से ज़्यादा समय तक जनसत्ता (इंडियन एक्सप्रेस समूह) से जुड़े रहे और फिर कोलकाता से प्रकाशित सन्मार्ग दैनिक में उन्होंने एसोसिएट एडिटर के पद पर पाँच सालों तक काम किया। वे मूलत: उत्तर प्रदेश के बलिया जिला के रहनेवाले हैं और देश की राजनीति पर गहरी पकड़ रखते हैं। उनकी शिक्षा-दीक्षा मगध विश्वविद्यालय बोधगया और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में हुई है। संप्रति वे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में अपने परिवार के साथ रहते हैं और पत्रकारिता के साथ लेखन के काम में लगे हुए हैं।.


Excerpt: 

सच पूछा जाए तो रामविलास पासिान का पहली बार संसद में पहंचना उनके पहले विधान सभा चुनाि की तरह
कु छ अजीबो-ग़रीब रहा था। अपने पहले विधान सभा चुनाि में बग़़ैर वकसी राजनीवतक पृष्ठभूवम के एक ऐसी
पार्टी से एक ऐसे क्षेत्र का वर्टकर्ट मांगने चले गए थे, जहां से उस पार्टी ने आज़ादी के बाद 1969 तक वकसी
चुनाि में
अपना उम्मीदिार नही ं खड़ा वकया था और वजस सीर्ट पर कांग्रेस का हमेशा से कब्ज़ा रहा था। पासिान ने िहााँ
से अपने पहले विधान सभा चुनाि में जीत कर संसोपा में हलचल मचा दी थी। 1977 का चुनाि भी उनके वलए
लोक सभा का पहला चुनाि था पर उन्ोनं े इसके वलए हाजीपुर से न तो वर्टकर्ट मांगा था और न ही जनता
पार्टी ने उन्ें
अपनी तरफ से िहााँ का उम्मीदिार बनाया था।


Write a Review

Review रामविलास पासिान.

Your email address will not be published. Required fields are marked *