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Tibet with My Eyes Closed

VoW 2020 / Sessions / November 20 / Tibet with My Eyes Closed

VoW 2020 | November 20 – 4:50 pm to 5:50 pm | Fireside Chat | English Literature

Tibet with My Eyes Closed

Bijoya Sawian in conversation with Madhu Gurung

Report

Session-19 Fireside chat: Tibet with my eyes closed

उत्तराखंड की प्रसिद्ध वैली ओफ़ वर्ड्ज़ साहित्य फ़ेस्टिवल इस वर्ष ऑनलाइन मनाया जा रहा है। सवोय होटेल, मसूरी इस कार्यक्रम की मेज़बानी कर रहा है। साहित्य प्रेमी अपने घर से ही वैली ओफ़ वर्ड्ज़ के अनेको प्रतिष्ठित साहित्यकारो को सुन सकते है जैसे वह उन्हें लाइव या अपनी आँखो के सामने ही सुन रहे हो ।
साहित्य महोत्सव के पहले दिन में ही 20 अधिवेशन हुए। उसमें से एक काफी रुचिकर सत्र , लेखिका, मधु गुरुंग जी के साथ बिजॉय सीवान जी का रहा। लेखिका यूएनआईएफईएम में मीडिया कंसल्ट, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस ट्रस्ट और बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन जैसे संगठनों के साथ काम कर चुकी हैं। उनकी पहली पुस्तक ‘बर्मीज़ फोकटेल्स’ बच्चों के लिए लिखी गई थी। ‘द कीपर ऑफ मेमोरीज़’ – गोरखाओ पर एक ऐतिहासिक कथा, वही “तिब्बत विद माई आईज़ क्लोज्ड”, तिब्बतियों पर लघु कथाओं का एक संग्रह उनकी तीसरी पुस्तक है। इस चर्चा में उन्होंने सीवान जी के साथ अपनी पुस्तक “तिब्बत विद माई आईज़ क्लोज्ड” के ऊपर रचनात्मक विचार विमर्श किया। बातचीत के दौरान उन्होंने यह भी बताया कि अपनी किताब का नाम उन्होंने “तिब्बत: विद माई आईज़ क्लोज्ड” इसीलिए चुना क्योंकि अभी तक उनको तिब्बत कि दिव्य भूमि पर जाने का अवसर तो नहीं प्राप्त हुआ , वरण उन्होंने कई तिब्बती जो कि जंपलिंग वृद्ध आश्रम , धर्मशाला में बीते कई वर्षों से रहते है, उन्हीं की आंखो से , उनके कहानियों के माध्यम से तिब्बत के दर्शन किए। पुस्तक तिब्बती लोगो पर ज्वलंत और गहरी भावनात्मक कहानियों का संग्रह है। मधु गुरुंग जी ने तिब्बती समुदाय के संघर्षों और सफलता , निराशा और आशा के बारे में बताते हुए कहा कि ” इतनी चुनौतियों के बावजूद , तिब्बती समुदाय के जैसे नम्र, करुणा से परिपूर्ण , दयालु, त्यागी, सहिष्णू लोग उन्हें कहीं और देखने को नहीं मिले”। जीवंत तिब्बती प्रार्थना ध्वज के रंगों का महत्त्व समझाते हुए लेखिका ने इस सत्र में बताया कि उन्ही रंगो से प्रेरित होकर उन्होंने , कहानियों को पांच रंगों में विभाजित किया है।
इस ऑनलाइन सत्र में उन्होंने युवाओं पर विशेष ज़ोर दिया। तिब्बत के युवाओं के बारे में बताते हुए कहा कि वह भारत से काफी आकर्षित रहते है। चाहे बॉलीवूड के गानों के प्रति उनकी दिलचस्पी हो या बंगलूरू के आईटी कंपनियों में कार्य कर अपने जीवन में कुछ कर गुजरने का जज्बा उनके अंदर , इतनी कठीन परिस्थितियों में भी कायम है।
सत्र में आगे बढ़ते हुए लेखिका ने चीन – तिब्बत के विश्वस्तरीय दुखद विवाद पर भी चर्चा करते हुए बताया कि तिब्बत के युवा निरन्तर चीन के खिलाफ अपना विरोध प्रदर्शन करते रहते है। आज भी स्वतंत्रता की आग सारे युवाओं के हिर्दय में प्रज्वलित है। उनका दृढ़ विश्वास यह चीख चीख कर कहता है कि स्वंतत्रता उनका जन्म सिद्ध अधिकार है, और वह दिन जरूर आएगा जब वह लौट कर अपने देश जाएंगे और शांति, अहिंसा के साथ आदर्श मनाव जीवन व्यतीत करेंगे।
इस ऑनलाइन सत्र को सुनने के बाद आप महसूस करेंगे कि तिब्बत की आजादी आपके लिए भी समान रूप से महत्व रखती हैं। लेखिका गुरुंग जी द्वारा सुनाए गए भारत में तिब्बती शर्णार्थियों के अनुभव और परिवार के अलगाव की पीड़ा , और अपने मातृभूमि से उखाड़ फेखे जाने के अनुभव आपको झकझोर कर रख देंगे। इसी प्रकार की और भावपूर्ण कहानियों को जानने के लिए मधु गुरुंग जी द्वारा लिखित किताब ” तिब्बत: विथ माय आईज क्लोज़ड” को आप पढ़ सकते हैं। यह पुस्तक amazon जैसे ऑनलाईन साइट पर भी उपलब्ध हैं। इसी प्रकार की और भी कई रचनात्मक, प्रभावी ऑनलाइन सत्र आने वाले दो दिनों तक वैली ऑफ वर्ड्स के माध्यम से आप तक पहुंचाया जाएगा। इसमें भाग लेेने हेेतु और भी जानकारियों के लिए इनके आधिकारिक वेबसाइट www. valleyofwords.org पर जा सकते है।
– Swarnim

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