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“Text and Context”

VoW 2020 / Sessions / November 21 / “Text and Context”

VoW 2020 | November 21 – 9:00 am to 9:45 am | Plenary Stage | Plenary

“Text and Context”

Dr. Arif Mohammad Khan(Hon’ble Governor of Kerala)

Report

21.11.2020
Plenary session : Text & context
Dr Arif Muhhamad Khan (Hon’ble Governor of Kerala)
प्लेनरी सेशन 21 नवम्बर, 2020

भारत अपने ज्ञान की वज़ह से सदा चमकता रहेगा : डॉ. आरिफ़

अंतरराष्ट्रीय साहित्य एवं कला महोत्सव, वैली ऑफ वर्ड्स के दूसरे दिवस की शुरुआत करते हुए सुहेल सईद ख़ान ने अपने सितार वादन की धुनों से लोगों का मंत्रमुग्ध किया। दूसरे दिन के प्लेनरी सत्र के संचालक डॉ. संजय चोपड़ा ने मुख्यअतिथि के रूप में केरल के राज्यपाल डॉ. आरिफ़ मोहम्मद खान का स्वागत किया। आगे बढ़ते हुए दर्शकों को उनका संक्षिप्त परिचय, शैक्षणिक योग्यता, उनके प्रकाशित लेख के बारे में बताया। उनकी लिखी हुई वर्ष 2010 की बेस्ट सेलर किताब “कुरान और समकालीन चुनौतियों” का उल्लेख करते हुए उनसे कई प्रश्न किए। भारत का संविधान भारत को धार्मिक समुदाय का संघ नहीं बनाता, इसके संदर्भ में डॉ. आरिफ़ ने बताया कि संविधान के शब्द हमारे स्वतंत्र आंदोलन के लोकाचार को प्रभावित करते हैं। भारत केवल एक देश नहीं बल्कि यह एक विभिन्न धार्मिक, सामाजिक और समुदायों का समूह है। उन्होंने यह भी बोला कि भारत में सिर्फ दो धर्म के लोग नहीं रहते हैं। अगर भारत का विभाजन धर्म के आधार पर हुआ, क्योंकि अगर होता तो भारत कई हिस्सों में बट जाता। राष्ट्र निर्माण का एकमात्र आधार धर्म नहीं था। भारत को अपने 200 वर्ष पुराने नीतियों के लिए बहूत भारी कीमत चुकानी पड़ी। भारतीय सभ्यता की शुरुआत से ही भारत में विश्वास, रंग, भाषा, रीति-रिवाजों और अधिकारों की विविधता है। यह विविधता हमें एक राष्ट्र बनाने से नहीं रोकती है।

अपना पक्ष रखते हुए डॉ. आरिफ ने कहा कि आज़ादी के बाद संविधान का निर्माण हुआ। संविधान की इकाई एक नागरिक होता है। हमने संविधान को तो नया बना लिया लेकिन आदतों को नहीं बदला। राजनीतिक रूप से हम आज भी समुदायों, समूहों के बारे में ही बात करते हैं न कि एक व्यक्तिगत नागरिक के रूप में। आज भारत में साक्षरता, जागरूकता, देशभक्ति की भावना बढ़ गई है। हमारा संविधान व्यक्तियों की गरिमा के बारे में बात करता है। किसी के पास किसी भी तरीके का दबाव देने का अधिकार नहीं है। हमारा संविधान 1950 से अधिकारों की बात करता है लेकिन अधिकारों की बात एशियाई सभ्यता सदियों से करती आ रही है। इतिहासकारों ने हमारे इतिहास को विकृत कर दिया है। उन्होंने यह भी बताया कि हमने अपने कानूनों को बदला लेकिन अपने राजनीतिक तरीकों को बदलना भूल गए। आज भारत बदल रहा है और एक विश्व शक्ति के रूप में उभर रहा है। हम भारतीय, मानवता के कल्याण के बारे में सोचते हैं। हमें एक सशक्त भारत को बनाने के लिए एकजुट होना आवश्यक है। आज हम सब अपने-अपने अधिकारों के बारे में जागरूक हैं। भारतीय ज्ञान के बारे में उन्होंने यह बताया कि भारतीय ज्ञान एक ऐसा हथियार है जिसकी वज़ह से आज भी भारत को कोई हरा नहीं सकता है। हम पहले थे, आज हैं और आगे भी अपने ज्ञान के वज़ह से सदा चमकते रहेंगे।
सत्र संचालक डॉ. संजय चोपड़ा ने डॉ. आरिफ़ का धन्यवाद किया और उनके हर एक कही गई बातों को सराहा।

1. डॉ. आरिफ़ मोहम्मद खान – केरल के राज्यपाल (मुख्य अतिथि उद्बोधन)
2. डॉ. संजय – सत्र संचालक
– कशिश नैना आर्य