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सेतु भाषाओं के

VoW 2020 | November 20 – 1:00 pm to 2:00 pm | Savoy State Room | Hindi Sahitya

सेतु भाषाओं के

सुभाष नीरव/संतोष आलेक्स/ जे॰ एल॰ रेड्डी/दामोदर खड्से/उत्पल बनेजी अध्यक्ष: लक्ष्मी शंकर बाजपेयी

Introduction

Setu Bhaashaon Ke – Bridges of Languages: The Importance of Translation

Subhash Neerav/Santosh Alex/JL Reddy/Damodar Khadse/Utpal Banerjee Chair: Lakshmi Shankar Bajpai

Report

Session-7 HI-1 सेतू भाषाओं के
वैली ऑफ वर्डस के तत्वाधान में आयोजित सेतू भाषाओं के कार्यक्रम में एल. स. बाजपेई, उत्पल बनर्जी, संतोष एलेक्स, सुभाष नीरव, दामोदर खडसे और जे. एल. रेड्डी जैसे दिग्गज अनुवादक शामिल थे । सभी ने अपनी-अपनी प्रांतीय भाषा में अनुवाद के क्षेत्र में उंदा काम किया है और अपनी प्रांतीय भाषा के संदर्भ में बात रखी। जहां उत्पल बनर्जी जोकि एक बंगाली – हिंदी अनुवादक हैं उन्होंने अनुवाद की जरुरत और अमर कृतियों का अनुवाद बंगला में समय की जरुरत बताया, वहीं जे. एल. रेड्डी, एक तेलेगु अनुवादक ने अनुवाद में गुणवत्ता, शब्द चयन का महत्व बताया, और कहा कि अनुवाद हमेशा अपनी मातृभाषा में ही होना चाहिए और यह भी बताया कि हिंदी लेखकों को भी एक दक्षिणी सीखनी चाहिए।
संतोष एलेक्स, मलयालम के कुछ ही किन्हीं गिने चुने अनुवादकों में से हैं उन्होंने ये साफ साफ स्पष्ट किया कि आज के समय में अनुवाद के क्षेत्र में युवाओं की कमी है और युवा केवल खाली पाठक तक सीमित हो चुका है, संतोष जी ने कहा कि 90 के दशक के बाद से अनुवाद के क्षेत्र में काम कम हुआ है साहित्य आज भी समृद्ध है, आवश्कता है तो केवल अनुवादकों की। मराठी-हिन्दी अनुवादक दामोदर खडसे जी ने हिंदी को सभी भाषाओं का केंद्र बिंदु बताया और कहा कि हिन्दी सभी भाषाओं का प्रवेश द्वार है।
अपनी बात रखते हुए खडसे जी ने कहा कि अनुवादकों को मूल लेखक की शैली और भावना का ध्यान रखना चाहिए। साथ ही साथ ये उम्मीद भी जताई कि जैसे प्रांतीय भाषाओं से हिंदी में अनुवाद होते हैं उसी प्रकार से हिंदी से प्रांतीय भाषाओं में भी अनुवाद होने चाहिए। सभी दिग्गजों ने अपनी-अपनी बात रखी और सरकार से ये उम्मीद की जैसे अन्य क्षेत्रों के लिए अखिल भारतीय स्तर पर विश्वविद्यालय बनाए गए हैं वैसे ही अनुवाद के क्षेत्र में भी अखिल भारतीय स्तर पर विशिष्ट प्रकार का मंच बनना चाहिए।
– Gayatri,