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प्राचीन मूल्य आधुनिक जीवन

VoW 2020 | November 20 – 2:15 pm to 3:15 pm | Savoy State Room | Hindi Sahitya

प्राचीन मूल्य आधुनिक जीवन

आशुतोष शुक्ल, मालनी अवस्थी, सुशील उपाध्याय, अंजुम शमाा अध्यक्ष: हृदय नारायण दीक्षत

प्राचीन मूल्य आधुनिक जीवन

Introduction

Pracheen Mulya Aadhunik Jeevan:

Ashutosh Shukla, Malini Awasthi, Sushil Upadhyay, Anjum Sharma

Chair: Hriday Narayan Dikshit

Report

Session 10, HI-2
प्राचीन मूल्य आधुनिक जीवन

1. अंजुम शर्मा – सत्र संचालक
2. मालिनी अवस्थी – गायिका
3. हृदय नारायण दीक्षित – लेखक, विधानसभा स्पीकर, उत्तर प्रदेश
4. आशुतोष शुक्ला – वरिष्ठ पत्रकार, लेखक

आधुनिकता का जन्म परंपरा की कोख से होता है

अंतर्राष्ट्रीय साहित्य एवं कला महोत्सव, वैली ऑफ़ बर्ड्स का आयोजन हर वर्ष देहरादून में किया जाता है। इस वर्ष भी इस महोत्सव का आयोजन वर्चुअल प्लेटफार्म पर तीन दिवस के लिए किया जा रहा है। इस महोत्सव में अनेक गणमान्य और प्रबुद्ध वर्गों के लोगों को सम्मानित किया जाएगा।

प्राचीन मूल्य आधुनिक जीवन के सत्र में अंजूम शर्मा (सत्र संचालक) ने सत्र की शुरुआत अतिथियों का स्वागत करने से किया और उनसे उनके क्षेत्र और प्राचीन मूल्यों को लेकर कई सवाल किए। भारतीय संगीत और लोक-संगीत पर अपना पक्ष रखते हुए मालिनी अवस्थी जी ने बताया कि भारतीय संगीत में कलाओं का महत्व मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि मूल्यों की परिस्थापना के लिए किया गया है। प्राचीन कथाएं नारियों को उनके आधुनिक जीवन में सशक्त बनाता है और उनके निर्णय लेने की क्षमता को भी बढ़ाता है। परंपरा का अर्थ यह है कि पीछे से लिया जाए और दूसरे को दिया जाए। मूल्यों का संरक्षण करना चाहिए लेकिन मानने और मनवाने से नहीं। युवाओं के बारे में उन्होंने यह कहा कि मूल्यों के आगे उन्हें समझौता नहीं करना चाहिए। नारियों को प्राचीन काल से ही पुरुषों से पहले पूजा जाता है। हमें आधुनिकता से परेशानी नहीं है बल्कि हमें परेशानी है पश्चिमी आधुनिकता से।

वहीं दूसरी ओर आशुतोष शुक्ला जी, जिन्होंने प्राचीन मूल्य के बारे में यह कहा कि हमारे मूल्य कहीं गए नहीं है बल्कि हम अपने आप को थोड़ा और गंभीर दिखाने के लिए अलग-अलग तरहों से सोचने और समझने का अभिनय करते हैं। पत्रकारिता के बारे में उन्होंने यह बताया कि आज के समय की पत्रकारिता पहले से ज्यादा कठिन हो गई है और मूल्यों का पतन और उत्थान हम सभी को और पूरे समाज को प्रभावित करता है। भारतीय संस्कृति में प्रश्न उठाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। उन्होंने कोरोना काल की पत्रकारिता को ध्यान में रखते हुए यह भी कहा कि भविष्य जब इतिहास लिखेगा तो 2020 के पत्रकारों की भूमिका का नए सिरे से लेखन होगा। परंपरा से ही आधुनिकता आगे बढ़ती है।

वहीं हृदय नारायण दीक्षित जी ने प्राचीन मूल्यों में उपनिषद का महत्व युवाओं को बताया जिसके बारे में उन्होंने अपनी पुस्तक में भी लिखा है। उन्होंने यह भी बताया कि प्राचीनता और आधुनिकता अलग नहीं है। काल के आधार पर संस्कृति को विभाजित करना यह वास्तव में सही नहीं है। जीवन मूल्य भारत की धरती पर सतत् प्रवाह होती आ रही है। आधुनिकता का अर्थ किसी पश्चिमी सभ्यता को उधार करना नहीं होता। आज की पीढ़ी उसी आधुनिकता को अपना रही है जिसकी वजह से वह अपनी संस्कृति को भुला रही है। प्रश्नों का प्रोत्साहन करने की परंपरा भारतीय संस्कृति में सदियों पुरानी है। प्रश्नों को देवताओं का दर्जा दिया गया है, क्योंकि यह माना जाता है कि प्रश्नों के द्वारा ही ज्ञान बढ़ता है। उन्होंने साथ ही यह बताया कि जो आज आधुनिक है, वह 50 साल बाद प्राचीन होगा लेकिन पुराने चीज़ों को हम ख़ारिज़ नहीं कर सकते हैं। प्राचीन, हमारा बीता हुआ भाग्य है। प्राचीनता से ही आधुनिकता का जन्म होता है।

अनन्तः सत्र का समापन अंजुम शर्मा ने सभी को धन्यवाद करते हुए किया।