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स्मृतियाँ जो संगिनी बन गयी (Smritiyan Jo Sangini Ban Gayi)

Nominated | Book Awards 2019 | Hindi Non-Fiction

स्मृतियाँ जो संगिनी बन गयी (Smritiyan Jo Sangini Ban Gayi)

Author: Mridula Sinha
Publisher: Bharatiya Jnanpith

Award Category: Hindi Non-Fiction

About the Book: 

दरअसल, उन महानुभावों ने भारतीय समाज में पुनर्जागृति लाने के लिए सबसे पहले समाज में नारी की सम्मान दिलाने और इनमें जागृति लाने के लिए शिक्षा के प्रचार-प्रसार को अहमीयत दी थी। उनकी बताई राह पर चलने वाले अन्यान्य लोगों में से एक थे स्व. बृजनन्दन शर्मा। बिहार के भूमि-पुत्र, जो हिन्दी प्रचारिणी सभा के मद्रास में सेवारत रहे। अपनी जन्मभूमि की याद आई और उन्होंने बिहार के समाज के पुनर्जागृति लाकर उन्नत बनाने के लिए बालिकाओं की शिक्षा को प्राथमिकता दी। सैकड़ों एकड़ बंजर पड़ी हुई भूमि का चुनाव किया। जंगल में मंगल की योजना बन डाली। राजनीतिक, सामाजिक,साहित्यिक और शैक्षणिक जीवन से जुड़े बिहार के तत्कालीन जनों में शायद ही कोई बचा हो जिन्हें शर्मा जी, हमारे बाबूजी कने विद्यापीठ के लिए सहयोग देने से वंचित रखा हो। अपनी सहधार्मिनी पत्नी श्रीमती विद्या देवी के तपबल और मनोबल का सहयोग लिए बाबूजी ने देखते-ही-देखते उस मरुभूमि पर बालिकाओं के लिए चन्दा इकट्ठा करने का नहीं वरन मध्यम श्रेणी के अभिभावकों को अपनी लड़कियों को शिक्षित बनाने की प्रेरणा देने तता निर्धन परिवारों से योग्य कन्याओं की बटोरने के लिए भी उनका भ्रमण जारी रहा।

About the Author: 

मुजफ्फरपुर जिला (बिहार) के छपरा गाँव में 27 नवम्बर, 1942 को जन्मी, श्रीमती मृदुला सिन्हा ने अपनी प्रारम्भिक छात्रवासीय शिक्षा बालिका विद्यापीठ,लखीसराय (बिहार) से प्राप्त की। उन्होंने बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर से मनोविज्ञान में स्नातकोत्तर एवं शिक्षा में स्नातक की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। विश्वविद्यालय की शिक्षा पूर्ण करने के बाद महिला कॉलेज, मोतिहारी (बिहार) में मनोविज्ञान के प्राध्यापक के रूप में अपना सार्वजनिक जीवन प्रारम्भ किया। श्रीमती सिन्हा रेडियो, दूरदर्शन तथा निजी क्षेत्र के टेलीविजन चैनलों द्वारा राजनैतिक मुद्दों तथा महिलाओं और बच्चों पर आयोजित विचार-विमर्श में नियमित रूप से भाग लेती हैं। समय-समय पर उनके लेख-निबन्ध तथा विचापपूर्ण साक्षात्कार विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते हैं। उन्होंने टेलीविजन कार्यक्रमों के लिए बहुआयामी आलेख भी लिखे हैं। विभिन्न विधाओं में 64 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित (1978 से लेकर अब तक) हो चुकी हैं। 2018 में विभिन्न विधाओं में 10 पुस्तकें प्रकाशकाधीन हैं। फीचर फिल्म दत्तक, खेल खेल में, ज्यों मेहँदी को रंग पर इसी नाम से बना धारावाहिक अनेकों बार दर्शाया गया है। बिहार विश्वविद्यालय ने वर्ष 2015 में इन्हें डीलिट की मानद उपाधि से सम्मानित किया है। श्रीमती सिन्हा ने विभिन्न राजनीतिक पदों पर आसीन होकर दल के अन्दर और समाज में अपनी विशेष पहचान बनाई हैं। वर्तमान में श्रीमती सिन्हा गोवा की राज्यपाल के पद पर आसीन हैं।

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