Simply enter your keyword and we will help you find what you need.

What are you looking for?

मेघ तृष्णा सिंधुःएक अभिलाषित त्रिशूल

 

 | Book Awards 2022 | Hindi Fiction

मेघ तृष्णा सिंधुःएक अभिलाषित त्रिशूल

हवाओं को पकड़ने की कोशिश मत करो! तूम सब उसके संग बह जाओगे"- यह कहते हुए वह जोर-जोर से पागलों की तरह हंसने लगी। " एक दिन ऐसा आएगा जब वह इसे लेने आएंगे और तुम चाह कर भी उन्हें रोक नहीं पाओगे।" अभिनिवेश द्वारा बताए गए वृतांत को सुनकर शिवेंदु एवं अग्निया यह तय नहीं कर पा रहे थे कि, उन्हें इस बात पर खुश होना चाहिए या कि परेशान। एक बार फिर वह उसी नाव पर सवार थे जिसमें 100 साल पहले मृगस्या था। उन्हें यह तो अंदेशा मिल गया था, कि इस वक्त पवित्र त्रिशूल कहां पर है, परंतु फिर भी वह आज भी एक शांति पूर्वक सिंधु सभ्यता के वासी थे, जिन्हें लड़ाई एवं उसके तौर-तरीकों के बारे में कुछ भी ज्ञात नहीं था। यह कहानी आपको 2000 साल पुरानी सभ्यताओं से जोड़ते हुए एक समुद्री यात्रा पर ले जाएगी। यह कोई  आम यात्रा नहीं है। यह ऐतिहासिक कहानी है, अपनी पवित्र मातृभूमि पर अपने प्राण निछावर कर के भी उसकी तथा अपनी पड़ोसी सभ्यता की खोई हुई महिमा एवं वैभव को पुनः प्राप्त करने की है एवं एक अमर कोशिश अपनी भूमि को अभिशाप से मुक्त करने की।

Full Title: मेघ तृष्णा सिंधुःएक अभिलाषित त्रिशूल

Author: Mishthi Arun
Publisher: Ira Publishers

Award Category: Hindi Fiction
About the Book: 

मेघ तृष्णा सिंधुः एक अभिलाषित त्रिशूल' एक ऐतिहासिक कहानी है, जो कि सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर मेसोपोटामिया सभ्यता पर आधारित है। सिंधु नदी सूख रही है और उसे हरा-भरा करने के लिए कहानी के तीन मुख्य किरदार शिवेंदू, अभिनिवेश और अग्निया को मेसोपोटामिया सभ्यता में जाकर अपना खोया हुआ त्रिशूल खोज कर लाना है, और उस त्रिशूल को वही खोज सकता है  जोकि शारीरिक मानसिक और आध्यात्मिक का मिलकर संपूर्ण  संयोजन बनाते हैं। इसे इस साल साहित्य अकादमी मध्यप्रदेश द्वारा अनुदान प्राप्त हुआ है।किताब के सभी कैरेक्टर का नाम उनके संपूर्ण स्वभाव को परिभाषित करता है। यहां तक कि नाम भी उस वक्त की सभ्यताओं द्वारा ही ढूंढ कर मतलब अनुसार लिए गए हैं।
उस जमाने में आधुनिक सुविधाएं तो थी नहीं, तो वह रोज की दिनचर्या या फिर समुद्री यात्रा के दौरान बेहद कुशल तरकीबें का इस्तेमाल करते थे जिनका व्याख्यान इस किताब में है।
यह एक ऐतिहासिक कहानी के साथ-साथ मनुष्य के मूल स्वभाव एवं उसमें समावेश शारीरिक मानसिक एवं आध्यात्मिक संतुलन का आवश्यक होना बयान करती है।
यह एक ट्रीलाजी है और यह भाग-1 है। इसका अगला अंक
असीम तृष्णा नीरनिधि -
एक अभिलाषीत त्रिशूल जल्द ही प्रकाशित होगा।


About the Author: 

मिष्ठी अरुण स्वयं को एक आम भारतीय महिला की तरह अनेक भूमिकाओं से सुसज्जित मानती हैं। उन्हे कई बार सांस्कृतिक गतिविधियों में पुरस्कार प्राप्त हुआ है एवं शिक्षा में भी गोल्ड मेडल हासिल किया है। बचपन से ही अपने पिताजी की सहायता से लेखन एवं विचार प्रस्तुत करने जैसी प्रतियोगिताओं में भाग लेकर विजयी रही हैं। और यहीं से इनके लेखन की शुरुआत हुई। वह अपने जीवन में लेखन और मानसिक सुकून को दो समानांतर रेखाओं की भांति देखती है, जो उसके साथ सदैव चलती रहेंगीं। वो उम्मीद करती हैं, कि उनकी यह किताब आपकी एक अच्छे साथी की तरह साबित होगी।


Excerpt: 

अग्निया, अभीनिवेश से," तुम रोज एक कबूतर को पिंजरे से आजाद कर उसे खुले समुद्र में क्यों छोड़ देते हो?"
उत्तर में अभीनिवेश मुस्कुराते हुए कहता है," यह एक छल है मेरे दोस्त! या यूं समझ लो एक तरीका। मैं इस कबूतर को मुक्त कर केवल यह देखता हूं की आस-पास यदि कोई द्वीप या फिर जमीन है क्या? यदि आस-पास कोई द्वीप होगा तो यह कबूतर वापस पिंजरे में नहीं आएगा अन्यथा इसे भूख और प्यास वापस पिंजरे की और खींच लाएगी। इस तरह हम आने वाले खतरे को पहले से भांप सकते हैं या फिर आपातकाल में भूमि की ओर रुख कर सकते हैं।"
कुछ समय पश्चात थका हुआ कबूतर वापस जहाज पर आ गया। अभिनिवेश ने उसके दाने पानी की व्यवस्था की और उसे वापस पिंजरे में डाल दिया। जिसे देखकर शिवेंदु ने कहा,"मैं हैरान हूं, यह देख कर कि पिंजरा भी किसी पक्षी को खुशी प्रदान कर सकता है।"
अभिनिवेश ने पिंजरे का दरवाजा बंद करते हुए कहा,"मैं अपने अनुभव से कहता हूं दोस्त, जीवन बहुत कठोर है। आपके पास सदैव ही विकल्प होते हैं और आपको उन में से वह चुनना पड़ता है जोकि कम तकलीफ दायक हो।"


Write a Review

Review मेघ तृष्णा सिंधुःएक अभिलाषित त्रिशूल.

Your email address will not be published.