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An Author’s Word: Mamta Kiran

1. If not an author which other creative field would one find you in and why?

यदि लेखक नहीं होती तो अपने समाज के शोषितों व वंचितों की आवाज़ बनती।उनकी समस्याएं सुनती और उन समस्याओं का समाधान किस विभाग से कैसे हो सकता है,उसके लिए दौड़भाग करती।उनका जीवन यापन किस तरह बेहतर हो सकता है इसके लिए उनकी हर संभव मदद करती।आज भी हमारे देश में गरीबी और भुखमरी है।ये कहते हुए दिल भर आता है कि 24 करोड़ लोग भूखे सोते हैं..।इस बाबत हाल ही में 116 देशों के सर्वे में हमारा भारत निचली पायदान (101 नम्बर) पर है।

2.What does the written word mean to you?

छपे हुए शब्द मेरे लिए बहुत मायने रखते हैं। बोले हुए,कहे हुए,सुने हुए शब्द एक दूसरे के बीच आवाजाही करते हुए ईधर से उधर हो सकते हैं.. उन शब्दों को यात्रा कराने वाला उसमें कुछ अपना जोड़ सकता है, घटा सकता है पर छपा हुआ शब्द जिसे कहते हैं न!ब्रह्म है तो छपे हुए शब्दों का वही महत्व है। छपा हुआ शब्द स्थिर है, सत्य है, उसकी यात्रा पढ़ते हुए मन के भीतर गुनते हुए होती है।

3.Your personal favourite five authors in any genre.

यूं तो बहुत सारे लेखक पसंद हैं एक लम्बी सूची हो सकती है…पर पांच ऑथर बताने हो तो :-

  1. मिर्ज़ा गा़लिब
  2. महादेवी वर्मा
  3. निदा फ़ाजली
  4. परवीन शाक़िर
  5. गुलज़ार

4.What is your favourite word, in any language, and how would you describe its meaning?

अपनी मातृभाषा हिंदी का शब्द ‘ममता’ मुझे पसंद है।ममता का अर्थ है-प्रेम, स्नेह।इस दुनिया में जहां कहीं भी आपको कुछ बंधा या जुड़ा दिखायी देता है वो प्रेम की, स्नेह की, ममता की डोर से बंधा है।आपके भीतर ममता है तो परिवार से बंधे रहते हैं,आपके भीतर ममता है तभी आप दूसरों का दुख,कष्ट समझ पाते हैं और उसकी सहायता करने को तत्पर होते हैं।आप कितना ही परेशानी में हो,उलझन में हो,कष्ट में हों,दुख में हों और कोई ममता भरा हाथ आपके सिर पर रख दे या अपनी ममता से आपको गले लगा लें तो लगता है कि कितना बड़ा सहारा मिल गया।अपनी ममता से आप अपने आसपास का वातावरण खुशनुमा रखते हैं..और देखिए न!मेरा नाम भी ममता है…।

5. E-Book or physical book? What do you prefer and why?

ई-बुक का चाहे कितना ही चलन हो जाए और टेक्नोलॉजी उसे चाहे कितना ही सुगम और खूबसूरत बना दे …मैं हमेशा ई-बुक के बजाय फिजिकल बुक ही पसंद करूंगी।किताब को हाथ में लेने का जो सुख है वो ई-बुक में नहीं है।शब्दों को स्पर्श कर, महसूस कर पढ़ने का जो अलौकिक आनंद है वो ई बुक में नहीं है।शब्दों के स्पर्श के साथ हमारा एक तादात्म्य स्थापित हो जाता है और वो हमें एक दूसरी ही दुनिया में ले जाते हैं।ऐसा लगता है जैसे हम अपनी मां की गोद में हों और हमारी भागमभाग या दौड़भाग वाली ज़िंदगी के बीच जो तमाम अनसुलझे प्रश्न होते हैं लगता है कि कहीं उन्हें भी छांव मिल गयी है।